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ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल करने के लिए जरूरी है मैग्नीशियम, इन तरीकों से करें डाइट में शामिल_我的网站

旋风少女第二季

一 |     लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज के समय में डायबिटीज एक आम बीमारी बन गई है। अनहेल्दी लाइफस्टाइल और डाइट की वजह से इस बीमारी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। डायबिटीज के मरीजों के लिए सबसे बड़ी ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल करना होता है। ब्लड शुगर को नियंत्रण (Blood Sugar Control) में रखने के लिए दवाओं के साथ-साथ सही डाइट का होना भी उतना ही जरूरी है।,हालांकि, अक्सर लोग इस बात ध्यान नहीं देते हैं कि मैग्नीशियम (Magnesium to Control Blood Sugar) भी ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने के लिए काफी जरूरी है। जी हां, मैग्नीशियम ब्लड शुगर लेवल को बेहतर तरीके से मैनेज करने में मदद कर सकता है। आइए जानें कैसे मैग्नीशियम इसमें मददगार है और इसकी कमी पूरी करने के लिए डाइट में किन-किन चीजों को शामिल करना चाहिए।,

मैग्नीशियम और ब्लड शुगर का कनेक्शन क्या है?

  • इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाता है- मैग्नीशियम बॉडी सेल्स को इंसुलिन के लिए सेंसिटिव बनाता है। जब शरीर में मैग्नीशियम की कमी होती है, तो सेल्स में इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ जाती है। इसका मतलब है कि ग्लूकोज सेल्स में प्रवेश नहीं कर पाता और खून में ही जमा होता रहता है, जिससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है।
  • ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म में मददगार- यह इंसुलिन के सीक्रेशन में मदद करके ग्लूकोज के मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है।
  • सूजन कम करता है- मैग्नीशियम में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो डायबिटीज से जुड़ी पुरानी सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं।

मैग्नीशियम की कमी के लक्षण

  • थकान और कमजोरी
  • मांसपेशियों में ऐंठन या कंपन
  • अनियमित हृदय गति
  • चिड़चिड़ापन

मैग्नीशियम को अपनी डाइट में कैसे शामिल करें?

हरी पत्तेदार सब्जियां- ,
  • पालक, केल, मेथी, सरसों का साग, और ब्रोकली जैसी हरी सब्जियां मैग्नीशियम का बेहतरीन सोर्स हैं।
नट्स और सीड्स-
  • एक मुट्ठी बादाम या काजू न केवल हेल्दी स्नैक्स हैं, बल्कि मैग्नीशियम की रोज की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा पूरा करते हैं।
  • कद्दू के बीज और सूरजमुखी के बीज मैग्नीशियम से भरपूर होते हैं।
  • तिल की गजक, तिल की चिक्की, या खाने में तिल का इस्तेमाल फायदेमंद हो सकता है।
साबुत अनाज-,
  • राजगीरा और कुट्टू ग्लूटेन-फ्री होते हैं और इनमें मैग्नीशियम भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इनसे बने आटे की रोटी या पराठे बनाए जा सकते हैं।
  • नाश्ते में ओट्स का दलिया बनाकर खाना एक बेहतरीन विकल्प है।
  • सफेद चावल की जगह ब्राउन राइस और जौ का इस्तेमाल करें।
दालें और फलियां-,
  • काले चने, राजमा, मूंग दाल, और सोयाबीन जैसी दालें और फलियां न केवल प्रोटीन का, बल्कि मैग्नीशियम का भी अच्छा सोर्स हैं।
डार्क चॉकलेट-
  • अगर आपको मीठा पसंद है तो यह आपके लिए अच्छी खबर है। 70% या उससे ज्यादा कोको वाली डार्क चॉकलेट मैग्नीशियम से भरपूर होती है। एक-दो छोटे टुकड़े काफी हैं।
केला और एवोकाडो-
  • केला सिर्फ पोटैशियम ही नहीं, बल्कि मैग्नीशियम का भी अच्छा सोर्स है। इसी तरह एवोकाडो भी एक पौष्टिक फल है जिसमें मैग्नीशियम पाया जाता है।
फैटी फिश-
  • सालमन और मैकेरल जैसी मछलियों में प्रोटीन और ओमेगा-3 फैटी एसिड के साथ-साथ मैग्नीशियम भी होता है।
यह भी पढ़ें- मैग्नीशियम की कमी होने पर शरीर 6 लक्षणों से देता है संकेत, नजरअंदाज करने की गलती बढ़ा देगी परेशानी यह भी पढ़ें- ब्लड शुगर चेक करते वक्त न करें ये गलतियां, वरना गलत हो जाएगी रीडिंग; डायबिटीज के मरीज रखें ध्यान Source:  NIH: https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC6356710/。    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। गुड़हल के पौधे के लाल-लाल फूल देखने में बेहद खूबसूरत लगते हैं। इसके फूल (Hibiscus Flowers) और भी कई रंग के होते हैं, जैसे- गुलाबी, सफेद, नारंगी आदि, लेकिन ज्यादातर लोग लाल रंग के गुड़हल घरों में लगाते हैं। ये फूल न सिर्फ देखने में खूबसूरत होते हैं, बल्कि इनका इस्तेमाल पूजा-पाठ और दवाएं बनाने में भी किया जाता है।,हालांकि, कई बार कुछ कारणों से पौधे पर फूल आने बंद हो जाते हैं। पौधा तो हरा-भरा रहता है, लेकिन पौधे पर फूल या तो बहुत कम आने लगते हैं या बिल्कुल नहीं आते। लेकिन चिंता मत करिए। एक छोटी-सी बात (Trick to Increase Hibiscus Flowers) का का ध्यान रखकर आप अपने पौधे को हेल्दी रख सकते हैं और इससे पौधे पर रोज फूल आने शुरू हो जाएंगे।,

फूल बढ़ाने का मैजिकल तरीका

  • क्यों जरूरी है प्रूनिंग? जब आप पौधे की शाखाओं और पुरानी पत्तियों की कटाई-छंटाई करते हैं, तो पौधे के पोषक तत्व और एनर्जी फूलों की कलियों को बनाने में लगता है। बिना कटाई के पौधा केवल लंबा होता जाता है, फूल कम आते हैं।
  • कब और कैसे करें? फरवरी-मार्च का समय प्रूनिंग के लिए सबसे अच्छा समय है। पौधे की सूखी, मरी हुई और कमजोर शाखाओं को काट दें और हेल्दी शाखाओं के ऊपरी सिरों को भी थोड़ा काटें। इससे पौधा चौड़ा होगा और उसमें ज्यादा शाखाएं निकलेंगी। ज्यादा शाखाएं यानी ज्यादा फूल।
  • फूल तोड़ना भी है जरूरी- जो फूल मुरझा गए हैं, उन्हें तुरंत तोड़ देना चाहिए। इससे पौधा बीज बनाने में एनर्जी खर्च नहीं करेगा और इसकी जगह नए फूल आते हैं।

कैसे करें गुड़हल के पौधे की देखभाल?

  • धूप- गुड़हल को फूलों के लिए भरपूर धूप चाहिए। रोजाना कम से कम 5-6 घंटे की सीधी धूप इसके लिए जरूरी है। अगर पौधा छांव में रहेगा, तो पत्ते तो आते रहेंगे, लेकिन फूल नहीं खिलेंगे। इसे ऐसी जगह रखें जहां सुबह की धूप पूरी तरह से मिले।
  • मिट्टी और गमला- गुड़हल की जड़ें जलभराव बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करतीं। इसलिए मिट्टी हल्की, भुरभुरी और अच्छी जल निकास वाली होनी चाहिए। मिट्टी में थोड़ी रेत, कोकोपीट और गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट मिलाएं। गमले में नीचे की ओर जल निकास के छेद जरूर बनाएं।
  • पानी- पानी देने का नियम समझदारी से अपनाएं। गर्मियों में मिट्टी सूखने पर पानी दें और सर्दियों में पानी की मात्रा कम कर दें। मिट्टी हमेशा थोड़ी नम रहनी चाहिए, गीली नहीं। ओवरवॉटरिंग से जड़ें सड़ सकती हैं और फूल आना बंद हो जाएंगे।
  • खाद- फूलों के लिए फॉस्फोरस और पोटैशियम सबसे जरूरी तत्व हैं। महीने में एक बार फास्फोरस वाली खाद जरूर दें। आप चाहें, तो केमिकल की जगह घर पर बने खाद भी दे सकते हैं।
  • केले के छिलके की खाद- केले के छिलके सूखाकर उनका पाउडर बना लें और मिट्टी में मिलाएं। यह पोटैशियम का बेहतरीन सोर्स है।
  • चाय की पत्ती या अंडे के छिलके- इन्हें सुखाकर मिट्टी में मिलाने से कैल्शियम और अन्य पोषक तत्व मिलते हैं। गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट डालते रहें।
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Published on:11:25:25


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